35 लाख जनसंख्या और करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए कम किया गया खतरा
मथुरा। धार्मिक पर्यटन के नक्शे पर तेजी से उभर रहे मथुरा में मौसम आपदा प्रबंधन बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। 35 लाख स्थानीय जनता के साथ ही करोड़ों पर्यटक श्रद्धालुओं की सुरक्षा हमेशा चुनौती देती है। इन चुनौतियों से स्थानीय आपदा प्रबंधन तंत्र कारगर तरीके से निपटता है। मथुरा में सर्दी और गर्मी दोनों रिकार्ड तोडती हैं। राजस्थान की सीमा से सटे और दिल्ली के नजदीक बसे मथुरा में भीषण गर्मी पडती है। हीट वेव की चपेट में जनद जल्द आ जाता है। हीट वेव प्रबंधन विगत कुछ वर्षों में खास कर पिछले दो साल में बडी चुनौती रहा है। मथुरा में हीट वेव से निपटने के लिए स्थानीय स्तर पर किये गये कार्यों को प्रदेश भर में सबसे बेहतर पांच कामों में गिना गया है। मथुरा जनपद को इस सूची में चौथा स्थान मिला है। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से 17 एवं 18 मार्च 2025 को हीट वेव प्रबंधन कार्यशाला का आयोजन लखनऊ स्थित जल एवं भूमि संस्थान में किया गया। जिसमें हीट वेव न्यूनीकरण के लिए किए जाने वाले कार्यों और उपायों पर चर्चा की गई। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा गत वर्ष 2024 में सभी 75 जनपदों के द्वारा किये गए कार्यों और हीट वेव प्रबंधन योजना का मूल्यांकन भी किया गया। इस मूल्यांकन में जनपद मथुरा की ओर से आपदा विशेषज्ञ सुशील कुमार ने प्रतिभाग कर जनपद मथुरा में गत वर्ष एवं वर्तमान वर्ष में हीट वेव से निपटने के लिए किए गए न्यूनीकरण प्रयासों का प्रस्तुतिकरण भी किया। प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि जनपद में गत वर्षों की तुलना में उत्तरोत्तर गर्मी की तीव्रता बढ़ती ही जा रही है। हीट वेव से होने वाले दुष्प्रभावों को कम करने के लिए नवाचारों, जागरुकता एवं प्रशिक्षण माध्यमों को अपनाया जा रहा है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण जीरो टॉलरेन्स, अवोइडेवल डेथ नीति पर लगातार कार्य कर रहा है। इस वर्ष में भी जनपद इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए दृढ़ता के साथ कार्य करेगा। इसी क्रम में जनपद में वर्ष 2024 में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा हीट वेव कार्ययोजना-2024 तैयार की गई एवं इसी कार्ययोजना को जनपद में हीटवेव के दौरान लागू किया गया था। वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश के सभी 75 जनपदों द्वारा हीट वेव कार्ययोजना-2024 तैयार की गई। उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के विशेषज्ञों एवं यूनिसेफ द्वारा इन सभी योजनाओं का मूल्यांकन कर पांच सर्वश्रेष्ठ जनपदों को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष योगेंद्र ढिमरी द्वारा सम्मानित किया गया ।जिसमें जनपद मथुरा ने चतुर्थ स्थान प्राप्त किया।