इन दिनों सनातनी होने और दिखने की अच्छी खासी होड़ है;किंतु ऐसे लोगों को तत्स॔ंबंधी ज्ञान अल्पतर ही है।वे ध्यान स्वदेशी और भारतीयता पर कम और अंग्रेजी तथा विदेशियत पर ज्यादा देते हैं।अब राम जन्मभूमि अयोध्या के कारकुंदो को ही देखिये।इन्हें तो पूर्ण रूप से स्वदेशियत में रॅगा पगा होना चाहिये और अंग्रेजियत से दूरी बनानी चाहिये;किंतु है इसके उलट।बताता हूॅ:जन्मभूमि अयोध्या में आगामी रामनवमी को रामलला का जन्म समारोह आयोजित है,जो 6 अप्रैल को है।इसके निमंत्रण पत्रों में प्रबंधकों ने अंग्रेजी की तारीख तो सही लिखी है,किंतु अपना स्वदेशी विक्रम संवत्सर गलत लिखा।वे उस दिन विक्रम संवत् 2081 ही बता रहे हैं,जबकि यह वत्सर तो 29 मार्च को ही समाप्त हो जायगा। 30 मार्च चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से विक्रम संवत् 2082 प्रारम्भ हो जायगा।स्पष्ट है कि रोजमर्रा में ये सनातनी अंग्रेजी पद्धति में ही रचे बसे हैं।अच्छा हो ये महानुभाव भारतीयता में ही ज्यादा रुचि लें।