रिपोर्ट : ठाकुर संजय सिंह
मथुरा। ब्रज में हुरंगा की अनूठी परंपरा है। ब्रज की होली भगवान श्रीकृष्ण पर केंद्रित है, जबकि दाऊजी का हुरंगा बलदेव जी पर केंद्रित है। गोप समूह गोपिकाओं के प्रेम से भीगे कोड़ों की मार नंगे बदन पर खाते हैं। ब्रज के राजा श्रीदाऊजी महाराज हैं। इसीलिए बिना दाऊजी के हुरंगे के होली पूरी नहीं मानी जाती। ठाकुर बांके बिहारी की नगरी श्रीधाम वृंदावन में की नगरी शनिवार को विश्व प्रसिद्ध हुरंगा का आयोजन धूमधाम के साथ किया गया। हुरियारिनों ने महारास किया। इसे देखने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। बैंडबाजे की धुन पर होली रसिया गीतों का गायन हुआ। दाऊजी महाराज को फाग महोत्सव पर हुरंगा खेलने के लिए निमंत्रण दिया जाता है। इसके बाद महिलाएं परंपरागत पोशाक लहंगा, फरिया, स्वर्ण आभूषण पहनकर हुरंगा में आती है। श्रद्धालु होली की मस्ती में आनंदित होते रहे। श्री कृष्ण-बलराम, राधा-कृष्ण स्वरूप झांकियां आकर्षण का केंद्र रहीं। इन्हें देखने के लिए दर्शकों में उत्सुकता चरम पर दिखी। मंदिर प्रांगण देवलोक जैसा दिखाई दे रहा था। मेरो खो गयो बाजू बंद रसिया होरी में, जि होरी नाय दाऊजी का हुरंगा हैश्, विभिन्न लोकगीत बजाए गए। कार्यक्रम की जानकारी देते हुए मंदिर सेवायत दीपक गोस्वामी ने बताया कि यह अत्यंत प्राचीन परंपरा है। जिसमें गोविंद घेरा क्षत्रिय समाज के पुरुष व महिलाएं हुरंगे में भाग लेती हैं। इससे पहले समाज के लोगों को निमंत्रण भेजा जाता है। महिलाएं सज धज कर हुरियारिनों के रूप में और पुरुष हुरियारे के रूप में हुरंगा खेलने आते हैं। हुरियारिनों के द्वारा हुरियारों के ऊपर लट्ठ चलाये। जिससे बचने के लिए हुरियारों ने ढाल से अपने आप को बचाया। ऐसा सूंदर दृश्य कभी देखा न होगा। हुरंगे के बाद दाऊजी महाराज की शोभायात्रा का आयोजन किया गया। जिसमें दाऊजी महाराज के विग्रह को विराजमान कर शोभायात्रा निकल गई। जो की मंदिर से प्रारंभ होकर बनखंडी महादेव, लोई बाजार, रेतिया बाजार, प्रताप बाजार, गोविंद देव मंदिर, चौराहा होती हुई मंदिर पर संपन्न हुई। कार्यक्रम में मुख्य रूप से विष्णु गोपाल गोस्वामी, धीरज गोस्वामी, अनंत गोस्वामी, जगन्नाथ पोद्दार, राजू बृजवासी, जॉय पोद्दार, धीरेन्द्र सिंह, भाव सिंह, राजेश अग्रवाल, गोविंद , दीपक अग्रवाल, मनोज, जॉय पोद्दार, नरेंद्र, सुरेश सिंह, श्याम सिंह, प्रिंस अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।