प्रदेश के मुख्यमंत्री के बनारस दौरे के दौरान उनकी फ्लीट में घुस आए एक सांड की सजा पशुपालन विभाग के उन कर्मचारियों को मिली जो पशुओं की देखरेख हेतु उत्तरदायी थे। प्रदेश मुखिया के सामने सांड़ आने की घटना को गंभीरता से लिया गया और पशु चिकित्सा एवं कल्याण विभाग के दो बेलदारों को निलंबित कर दिया गया है। आउटसोर्स पर तैनात 14 कर्मचारियों की सेवाये भी समाप्त कर दी गई हैं।
प्रदेश के मुखिया होली के पहले वाराणसी आकर विकास कार्यों का निरीक्षण और समीक्षा बैठक कर गए थे। काल भैरव और काशी विश्वनाथ मंदिर जाते समय कबीरचौरा में उनकी फ्लीट के सामने एक सांड़ आ गया था।तमाम सतर्कता और तैयारियों के बाद भी मुख्यमंत्री की फ्लीट के सामने सांड आने को बेहद गंभीर माना गया है। नगर आयुक्त ने दो बेलदारो को तो तत्काल प्रभाव से निलंबित किया ही आउटसोर्स के बारह कर्मचारियों की सेवाये भी समाप्त कर दी गई।
नगर आयुक्त ने आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती करने वाली कंपनी को भी अंतिम चेतावनी निर्गत कर उनकी कार्यशैली पर सवाल उठाने के साथ साथ कंपनी को ब्लैक लिस्ट किया जाने की चेतावनी जारी की है।
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भले हो यह कार्यवाही योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के अंतर्गत की गई है परन्तु इस घटना ने उस समय की याद को ताजा कर दिया है जब प्रदेश के एक कबीना मंत्री की खोई हुई भैंस खोजने के लिए पूरा थाना दौड़ पड़ता था।
योगी सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति सिर्फ मुख्यमंत्री की फ्लीट के आगे सांड आ जाने पर कार्यवाही की जद तक सीमित न रखते हुए उन आम राजमार्गों तथा नगरों में सैकड़ों की संख्या में आवारा घूमते पशुओं की देखरेख करने वाले जिम्मेदारों तक बढ़ाए जाने की आवश्यकता है जिससे सही मामले में वी आई पी कल्चर समाप्त होने तथा जीरो टॉलरेंस के रूप में देखा जा सकेगा।