मथुरा। उत्तर प्रदेश पंडित दीनदयाल उपाध्याय पशुचिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गौ अनुसंधान संस्थान (दुवासु) मथुरा के मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय में आज से एनएफडीबी प्रायोजित अंतर्देशीय खारे पानी के क्षेत्रों में झींगा पालन के लिए सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियाँ विषय पर 3 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इसमें 25 प्रतिभागियों ने भाग लिया। वक्ताओं ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश का क्षेत्र खारे पानी के संसाधनों से बहुत समृद्ध है। जिसका उपयोग झींगा फार्मों के विकास के लिए बहुत अच्छी तरह से किया जा सकता है। यह जिले में पहला प्रशिक्षण है। जिसमें प्रशिक्षुओं को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जायेगा। प्रशिक्षण के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अरुण कुमार मदान ने मछली पालकों को इस प्रशिक्षण अवसर का पूरा लाभ उठाने तथा विशेषज्ञों के व्याख्यानों से झींगा पालन की तकनीक सीखने की सलाह दी। अधिष्ठाता मत्स्य विज्ञान डॉ. नित्यानंद पांडेय ने झींगा पालन से होने वाले आय एवं लाभ के विषय में प्रशिक्षणार्थियों से विस्तृत चर्चा की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि एवं निदेशक प्रसार डॉ. अतुल सक्सेना, निदेशक शोध डॉ. विनोद कुमार, अधिष्ठाता पशु चिकित्सा डॉ. विकास पाठक, उप निदेशक मत्स्य डॉ. राजेंद्र सिंह चंदेल, मुख्य वक्ता डॉ. देबतनु बरमन, डॉ. लक्ष्मी प्रसाद आदि उपस्थित रहे। प्रशिक्षण में प्रदेश के मत्स्य पालकों के साथ साथ आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार, राजस्थान आदि प्रदेशों से भी मत्स्य पालक एवं छात्र उपस्थित रहे। प्रशिक्षण समन्वयक डॉ .परमवीर सिंह, सहायक आचार्य, प्रशिक्षण सह समन्वयक सहायक आचार्य डॉ. मुक्ता सिंह ने सभी का आभार व्यक्त किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ लक्ष्मी प्रसाद, विभागाध्यक्ष एक्वाकल्चर विभाग द्वारा दिया गया।