राजधानी निवासियों के लिए यह जानना रोचक हो सकता है कि परिवहन के ब्लैक स्पॉट के रूप में राजधानी पहले नंबर पर आती है।
परिवहन विभाग की ओर से पिछले ग्यारह माह में हुए सड़क हादसे की वजहों के आधार पर ब्लैक स्पॉट की रिपोर्ट तैयार की गई है। इस रिपोर्ट में लखनऊ के 13 सड़कें ऐसी चिन्हित हुई है जहां बीते 11 माह में ब्लैक स्पॉट पर सबसे ज्यादा 196 हादसे हुए हैं। इनमें चार जगह ऐसे भी चिन्हित किए गए है, जिसे रेड जोन घोषित किया गया है। यहां पर 46 सड़क हादसे दर्ज किए गए।
यह खतरनाक रेड जोन लखनऊ-सीतापुर मार्ग पर सीडीआरआई तिराहा, अजगैन-मलिहाबाद-इटौंजा मार्ग पर माल रोड, कुर्सी देवा-चिनहट मार्ग पर मोहान रोड पर, तथा कुम्हरांवा-बाबागंज मार्ग पर जीसीआरजी पर चिन्हित हुए हैं।
इन चारों स्थानों पर अंधे मोड़ पर तेज रफ्तार के चलते यह सड़क हादसे हो रहे हैं जिसके कारण लखनऊ परिवहन के लिए ब्लैक स्पॉट बन गया है।
पाठकों की जानकारी के लिए बता दें कि ब्लैक स्पॉट उस स्थान को कहा जाता हैं जहां किसी भी सड़क पर 500 मीटर के दायरे में तीन वर्षों में कम से कम पांच भीषण सड़क दुर्घटनाओं में 10 लोगों की मौत हुई हो या पांच लोगों के गंभीर रूप से घायल होने पर उस स्थान को ब्लैक स्पॉट के रूप में घोषित किया जाता है। इन स्थानों पर दौरा करके सड़क दुर्घटनाओं के कारण की जांच करके इंजीनियरिंग या निर्माण व डिजाइन से संबंधित कमी पाए जाने पर लोक निर्माण विभाग उसे सही करवाने की जिम्मेदारी लेता है।
विगत वर्ष के आंकड़ों के आधार कर लखनऊ में 86 और शामली में सबसे कम एक ब्लैक स्पॉट चिन्हित हुए हैं। ब्लैक स्पॉट में दूसरे नंबर पर आगरा में 49, प्रयागराज में 46, बरेली 45 ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए हैं। सबसे कम ब्लैक स्पॉट वाले जिलों में प्रतापगढ़ व श्रावस्ती में तीन-तीन, कौशांबी व कासगंज में दो-दो व शामली में एक ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए हैं।
बढ़ते हुए शहरीकरण के बीच राजधानी में आबादी के बढ़ते दबाव के बीच आवागमन का सुरक्षित न होना और सर्वाधिक। ब्लैक स्पॉट राजधानी में चिह्नित होना राजमार्गों का रखरखाव करने वाले विभागों तथा जिम्मेदार परिवहन अधिकारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए।