होली के अवसर पर दो पहिया वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबरें अचानक बढ़ जाती है जिसका कारण लापरवाही पूर्वक दो पहिया वाहन चलाना तो है ही लेकिन इन दुर्घटनाओं में गंभीर क्षति के अधिकांश मामलों में बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाने के मामले ही रहे हैं।
दो पहिया वाहन सवारों के लिए हेलमेट अनिवार्य करने के लिए पहले भी कई प्रयास हो चुके हैं लेकिन अभी तक इसमें पूरी तरह सफलता नहीं मिल पाई है तो उसके पीछे प्रशासनिक उदासीनता मुख्य वजह है।
अब एक बार फिर इसको लेकर सख्ती बरते जाने की योजना है और इसकी शुरुआत लखनऊ में लागू किए गए उस आदेश से हुई है जिसने कहा गया है कि यदि किसी दो पहिया चालक ने हेलमेट नहीं पहन रखा है तो उसे पेट्रोल पंप पर पेट्रोल ना दिया जाए। महत्वपूर्ण यह है कि इस आदेश को लेकर प्रशासनिक स्तर पर सख्ती भी की जाए और इसकी नियमित मॉनिटरिंग भी हो।
यदि कोई पेट्रोल पंप इसे नहीं मान रहा है तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जाए। सिर्फ लखनऊ में ही नहीं, प्रदेश के सभी महानगरों और जिलों में जल्द ही इस नियम को लागू किया जाना चाहिए। सड़क सुरक्षा के नियम इसलिए बनाए गए हैं कि लोगों की जिंदगी सुरक्षित रहे। इसका पालन अनिवार्य रूप में किया जाना चाहिए। देश में सर्वाधिक सड़क दुर्घटनाएं उत्तर प्रदेश में होती हैं तो इसका मुख्य कारण यातायात नियमों की अनदेखी है। लोगों को यह समझना होगा कि उनके परिवार के लिए उनकी जिंदगी मायने हैं और उनकी जरा सी असावधानी या लापरवाही खुद ही उन्हें तो खतरे में डालेगी ही, उनकी वजह से दूसरों की जिंदगी भी असुरक्षित हो सकती है।
दौड़ भाग से भरे शहरी जीवन में बिना दोपहिया वाहन के जिंदगी का सुचारू रूप से चलना असंभव सा हो चला है वही ग्रामीण जीवन में भी आवागमन के प्रमुख साधन के रूप में दोपहिया वाहनों की अपरिहार्यता किसी से छुपी नहीं है।
दो पहिया वाहन चालकों के मध्य हेलमेट पहनने को लेकर एक ऐसा बड़ा जागरूकता अभियान चलाए जाने की आवश्यकता है जिसमें शत प्रतिशत दो पहिया वाहन चालक हेलमेट का उपयोग करने लगें। इससे दो पहिया वाहनों से होने वाली दुर्घटना में चालक को होने वाली गंभीर क्षति के मामलों में निश्चित रूप से कमी आएगी।