यूं तो ‘सीमाएं टूटती है’ श्रीलाल शुक्ल जी के एक साहित्यिक जासूसी उपन्यास का शीर्षक है लेकिन इधर अचानक यह शीर्षक जैसे जीवंत हो उठा है।
इस जासूसी जासूसी साहित्यिक उपन्यास में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर जब एक निर्दोष अधेड़ व्यक्ति हत्या के आरोप में उम्र कैद की सजा पाता है तो उसकी छोटी पुत्री पिता को निर्दोष सिद्ध करने के लिए ढेर सारे उपक्रम करती है।
इसी दौरान जब वह वास्तविक हत्यारे तह पहुंचती है तो वास्तविक हत्यारे द्वारा उसके पिता और परिवार पर किए अहसानों के कारण पिता के निर्दोष होने की लड़ाई में जिन सीमाओं में बंध जाती है उनको तोड़ने की कहानी उपन्यास का मुख्य कथानक है।
संयोगवश इस उपन्यास का जिक्र यूं करना पड़ रहा है क्योंकि भारतीय राजनीति में में भी कमोवेश ऐसी ही परिस्थितियां निर्मित होने लगी है जब देशद्रोह जैसे अपराध के घटित होने के समस्त साक्ष्य खुले आम उपलब्ध है और उन अपराधियों के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
अभी तक देश के अनेक राज्यों के मुख्यमंत्री अपने राज्य की सीमाएं लांघकर उन विषयों पर बयानबाजी करने से नहीं चूकते थे जो राष्ट्रीय महत्व के और केंद्रीय सरकार के नियंत्रण के विषय होते थे लेकिन अब एक राज्य के मुख्यमंत्री ने तो बयानबाजी की सीमाओं को तोड़कर अपने राज्य में एक ऐसा कार्य कर डाला है जो देश की आर्थिक प्रगति में बड़े सवाल पैदा कर सकता है।
यह प्रश्न देश की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है। तमिलनाडु और अन्य दक्षिण भारतीय राज्य अपने हिंदी विरोध के लिए पहले ही जाने जाते रहे हैं लेकिन इस बार उन्होंने अपनी सीमा पार करते हुए एक ऐसा कार्य कर डाला है जो राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आंका जाना चाहिए।
तमिलनाडु सरकार ने राज्य बजट में रुपये के प्रतीक (₹) को बदलकर ‘ரூ’ (तमिल अक्षर) इस्तेमाल किया है!
हिंदी का विरोध करने वाले ऐसे महानुभावों से विनम्र निवेदन है कि कृपया राष्ट्र भाषा हिन्दी का सम्मान उसी प्रकार करें जिस प्रकार भारतीय संविधान ने देश की अन्य भाषाओं को सम्मानित दृष्टि से स्वयं अनुसूची में सम्मिलित किया है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी जी ने हाल ही में इंडिया टुडे कॉन्क्लेव में कहा भी था कि – किसी भी भाषा को थोपना गलत है, लेकिन अगर हिंदी सीखने से फायदा होगा, तो मैं सीखूंगा. उन्होंने अपने वक्तव्य में यह भी जोड़ा कि हिंदी सीखने का सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि अब वे मोदी जी को टोक सकते हैं..!
भारतीय न्याय संहिता देश की मुद्रा को प्रभावित अथवा विरूपित करने से संबंधित अपराध को गंभीर अपराध की श्रेणी में गैर जमानतीय अपराध में वर्गीकृत करती है तो क्या भारतीय रूपये को प्रदर्शित करने वाले चिन्ह ₹ को विरूपित करने के लिए संबंधित अपराधियों के विरुद्ध कार्यवाही करेगी अथवा श्रीलाल शुक्ल जी के उपन्यास के शीर्षक सीमाएं टूटती है कि मानिंद यह अपराध सिर्फ नीति निर्धारकों की अनदेखी बनकर रहा जायेगा?