दिल्लो हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर आग लगी,तो उनके सामान की जानकारी हुई।देश के सामने एक भयानक तथ्य सामने आया,जब उनके घर में अकूत नकद धनराशि मिली।यदि किसी नेता या नौकरशाह के घर ऐसा हुवा होता तो तूफान खड़ा हो गया होता।नेता का इस्तीफा और नौकरशाह का निलम्बन हुवा होता;किंतु जज साहब का केवल स्थानांतरण दिल्लो से इलाहाबाद हाई कोर्ट किया गया।स्थानांतरण कोई दण्ड नहीं है।सुप्रीमकोर्ट ने एक जाॅच बैठाई जरूर है,किंतु यह औपचारिकता मात्र ही रहेगी।विगत में एक सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त जज ए के गांगुली पर एक प्रशिक्षु(इण्टर्न)युवती से छेड़छाड़ के गम्भीर आरोप लगे थे।जाॅच तब भी बैठी थी;किंतु जज पर कार्यवाही के बजाय उस युवती और उसकी महिला अधिवक्ता को ही भाॅति भाॅति से परेशान किया गया।बड़े वकील कपिल सिफ्बल और अरुण जैटली ने इस पर उॅगली उठाई थी।क्या जज कानून से ऊपर या भगवान हैं?वे चाहे जो करें;भ्रष्टाचार या बलात्कार।तुलसीदास ने कहा है,”सामरथहिं नहिं दोष गोसाईं।रवि पावक सुरसरि की नाईं”।उन्हें सर्वाधिकार प्राप्त हैं।वैसे अपने देश के मानदण्ड अति उच्च रहे हैं।यहाॅ जब भगवानों पर भी आरोप लगे हैं, वे जनमत के सामने नत मस्तक हुए हैं।श्रीराम पर सीता जी के रावण के आधिपत्य में रहने को लेकर लोकापवाद हुवा था,तब,जैसा कि वाल्मीकि रामायण में लिखा है,उन्होंने सीता जी का निर्वासन किया था,हालाॅकि वे अग्नि परीक्षा दे चुकीं थीं।।श्रीकृष्ण जी पर सत्राजित की स्यमंतक मणि छीनने के आरोप लगे,तो उन्होंने सच्चाई पता लगाई और जामवंत की गुफा से वह मणि बरामद की,जामवंत से युद्ध किया और समाज के सामने सच्चाई मणि लाकर रख दी। वे निर्दोष थे।क्या जज साहब इन विभूतियों से भी बड़े हैं?कदापि नहीं।वे दण्डनीय हैं।